ज़ीरो माइल पटना

978-93-92017-02-5

LeftWord Books, New Delhi, 2021

Language: Hindi

148 pages

5.5 x 8.5 inches

Price INR 250.00
Book Club Price INR 175.00
INR 250.00
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LWB1192

ज़ीरो माइल एक ऐसी सीरीज़ है, जो हमारे चिर-परिचित शहरों को एक नयी नज़र से देखती है। इस सीरीज़ की हर किताब एक ऐसे जाने-माने लेखक की क़लम की देन है, जो उस शहर से गहरा लगाव रखते हैं, लेकिन शहर के विभिन्न पहलुओं का तटस्थ होकर विश्लेषण भी करते हैं। उन्होंने शहर के बाहर रहते हुए शहर को लेकर जो कुछ महसूस किया, उसे भी साझा किया है।
इसकी पहली कड़ी के रूप में पटना शहर पर यह किताब प्रस्तुत है। इसमें कवि-कथाकार संजय कुंदन ने शहर के बुनियादी चरित्र को पहचानने की कोशिश करते हुए इसके जनजीवन की एक झाँकी पेश की है। उन्होंने शहर में आ रहे बदलावों को रेखांकित किया है और इसकी कुछ स्थायी समस्याओं की चर्चा भी की है।
यह न तो शहर का इतिहास है, न संस्मरण, न ही समाजशास्त्रीय विवेचन, लेकिन इसमें इन तीनों की ताक़त और रोचकता समाहित है। ज़ीरो माइल पटना उस शहर को लिखा एक प्रेम पत्र है – और हर प्रेम पत्र की तरह इसमें प्यार भी है, शिकायत भी, दुलार भी है, अनबन भी।

Sanjay Kundan

कागज के प्रदेश में, चुप्पी का शोर, योजनाओं का शहर और तनी हुई रस्सी पर संजय कुंदन के कविता संग्रह हैं। बॉस की पार्टी और श्यामलाल का अकेलापन उनके कहानी संग्रह हैं जबकि टूटने के बाद और तीन ताल उनके उपन्यास। उन्हें भारतभूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, विद्यापति पुरस्कार और बनारसी प्रसाद भोजपुरी पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने जॉर्ज ऑरवेल की एनिमल फार्म, रिल्के की लेटर्स ऑन सेज़ां और विजय प्रशाद की वॉशिंगटन बुलेट्स का हिंदी में अनुवाद किया है।