नागरिकता का काग़ज़ी खेल

978-81-943579-2-6

वाम प्रकाशन, New Delhi, 2019

Language: Hindi

135 pages

5 x 7.5 inches

Price INR 100.00
Book Club Price INR 70.00

जब तक आवाज़ बची है, तब तक उम्मीद बची है। इस श्रृंखला की अलग-अलग कड़ियों में आप अपने समय के ज्वलंत प्रश्नों पर लेखकों-कलाकारों-कार्यकर्ताओं की बेबाक टिप्पणियाँ पढ़ेंगे।

INR 100.00
In stock
SKU
LWB603

असम में 19 लाख लोग एनआरसी की आख़िरी सूची से बाहर हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने 20 नवंबर 2019 को संसद में स्पष्ट घोषणा की है कि नागरिकता (संशोधन) क़ानून लाने के बाद इसे नए सिरे से पूरे मुल्क में लागू किया जाएगा। पूरे मुल्क में एनआरसी तैयार कराने के क्या मायने हैं? इसके निशाने पर कौन हैं? असम में इसके बनने की प्रक्रिया से क्या सबक़ मिलता है? अनागरिक घोषित कर दिए गए लोगों का मुस्तक़बिल क्या होगा? इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश है यह पुस्तिका।

लेखक : हर्ष मंदर | वर्णा बालाकृष्णन | ज़मसेर अली | अब्दुल कलाम आज़ाद | सेंटर फ़ॉर इक्विटी स्टडीज़ 
सुबोध वर्मा | सुप्रकाश तालुकदार | संगीता बरुआ | तीस्ता सेतलवाड़ | एजाज़ अशरफ़
अजय गुडावर्थी | टी.के. राजलक्ष्मी

Harsh Mander

Harsh Mander, 56, social worker and writer, is a former civil servant. He has taught at the Indian Institute of Management, Ahmedabad; St Stephen's College, Delhi; California Institute of Integral Studies, San Francisco; LBS National Academy of Administration, Mussoorie; and the Nelson Mandela Centre for Peace and Conflict Resolution, Jamia Millia Islamia, Delhi.


Pranjal

Pranjal is a journalist and activist who works with Newsclick. He has been associated with the student movement for a long time.


Sanjeev Kumar

Sanjeev Kumar is an Associate Professor at Deshbandhu College, Delhi University. He is a critic and story writer.


Shipra Kiran

Shipra Kiran is an Editor at Vaam Prakashan.