Koshish

9788183618366

Rajkamal Prakashan, New Delhi, 2017

Language: English

84 pages

Price INR 99.00
Book Club Price INR 85.00
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LWB542
साहित्य में ‘मंज़रनामा’ एक मुकम्मिल फॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयाँ अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इंटरप्रेटेशन हो जाता है। मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ा$फा हो गया है। ‘कोशिश’ गुलज़ार की सबसे चर्चित और नई ज़मीन तोडऩेवाली फिल्मों में से है। गूँगे-बहरे लोगों के विषय में एक जापानी फिल्म से प्रेरित होकर उन्होंने हिन्दी में ऐसी एक फिल्म बनाने का जोखिम उठाया और एक मौलिक फिल्म-कृति हिन्दी दर्शकों को दी। फिल्म में कलाकारों के अभिनय और संवेदनशील निर्देशन के कारण इस फिल्म को क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है। यह इसी फिल्म का मंज़रनामा है।

Gulzar

Gulzar, is a poet above all things. His style marks a sensitivity that is best reflected in his writing and treatment of films. He is one of those sensitive people whose work is laced with the lyrical but psychologically adept examination of human sensibilities. Gulzar's writings reflect his keen observation of life and the environment around him. Without in any way compromising on artistry or lyricism, his poems incorporate the mundane and the everyday to create vivid images. He has published a number of poetry anthologies, collections of short stories, and a biography of Mirza Ghalib. He is regarded as one of India's finest writers for children with several books for children to his credit. He has also published the scripts of many of his films.